मुंबई उपनगरीय रेलवे में बढ़ती यात्रियों की संख्या और भीड़ को देखते हुए रेलवे ने स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (ATP) प्रणाली के अगले चरण ‘कवच 5.0’ को विकसित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
रेलवे प्रशासन की इस प्रणाली से लोकल ट्रेनों की समयबद्धता में सुधार होगा। यह प्रणाली विशेष रूप से मुंबई जैसे अत्यधिक व्यस्त उपनगरीय रेलवे मार्गों के लिए विकसित की जा रही है। इसमें दो लोकल ट्रेनों के बीच सुरक्षित अंतर (हेडवे) कम करने की क्षमता होगी। इससे वर्तमान में हर 3 मिनट में आने वाली लोकल ट्रेनें आने वाले समय में हर दो मिनट में उपलब्ध हो सकेंगी।
मुंबई उपनगरीय रेलवे दुनिया की सबसे व्यस्त रेलवे सेवाओं में से एक है। पश्चिम रेलवे और मध्य रेलवे मार्गों पर रोजाना करीब 3,254 एसी और नॉन-एसी लोकल ट्रेनें कुछ-कुछ मिनटों के अंतराल पर चलती हैं। ऐसी स्थिति में ट्रेनों के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए उसमें और कमी करने तथा अधिक लोकल ट्रेनें चलाने के लिए ‘कवच 5.0’ महत्वपूर्ण साबित होगी। रेलवे प्रशासन के अनुसार, नई सिग्नलिंग प्रणाली शुरू होने के बाद लोकल ट्रेनों की संख्या बढ़ाकर 4,000 तक करना संभव हो सकता है।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 11 अप्रैल 2025 को ‘कवच 5.0’ की घोषणा की थी। फिलहाल इस प्रणाली की तकनीकी विशेषताओं को अंतिम रूप देने का काम अनुसंधान डिजाइन एवं मानक संगठन (RDSO) कर रहा है। वर्तमान में भारतीय रेलवे द्वारा ‘कवच 4.0’ लागू किया जा रहा है और पश्चिम रेलवे के मुंबई-दिल्ली हाई डेंसिटी कॉरिडोर के 693 रूट किलोमीटर पर इसे स्थापित करने का काम जारी है। इसके बाद उपनगरीय सेवाओं के लिए अलग से ‘कवच 5.0’ लागू किया जाएगा।
ऑटोमैटिक सिग्नल प्रणाली के कारण ट्रेन की आवाजाही के अनुसार सिग्नल अपने आप बदलते हैं। इससे ट्रेनें सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए कम समय के अंतराल पर चल सकती हैं। जैसे ही कोई ट्रेन किसी ब्लॉक पर कब्जा करती है, संबंधित सिग्नल लाल और उसके पीछे वाला सिग्नल पीला हो जाता है। ऑक्जिलरी वार्निंग सिस्टम के तहत पीला सिग्नल मिलने के बाद यदि मोटरमैन पुष्टि नहीं करता है, तो ट्रेन अपने आप रुक जाती है। लाल सिग्नल पार करने की कोशिश होने पर ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोक दिया जाता है। इससे सुरक्षा का एक अतिरिक्त स्तर सुनिश्चित होता है।
कवच 5.0 कैब-आधारित सिग्नलिंग प्रणाली होने के कारण मौजूदा पारंपरिक सिग्नल पोल पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं होगी। इस प्रणाली में सिग्नल से संबंधित जानकारी सीधे लोको पायलट के ड्राइविंग कैब में लगे डिस्प्ले पर उपलब्ध होगी। हालांकि, शुरुआती संक्रमण अवधि और आपातकालीन वैकल्पिक (फॉलबैक) व्यवस्था के तौर पर कुछ समय तक सिग्नल पोल को बनाए रखा जाएगा।
